अध्याय 1: बदन की आग 1
अमन ने जैसे ही घर के मुख्य दरवाजे की कुंडी लगाई, उसके कानों में एक गहरा सन्नाटा गूंज उठा। घर, जो आम तौर पर परिवार की हलचल से भरा रहता था – रोहन की हंसी, टीवी की आवाजें, रसोई से आती खटपट – आज पूरी तरह से खाली और नीरस लग रहा था। सब बाहर मूवी देखने गए थे, और यह फैसला अचानक ही हुआ था, शायद किसी पारिवारिक उत्साह में। घर की दीवारें, जो सफेद प्लास्टर से ढकी हुई थीं और जगह-जगह परिवार की तस्वीरों से सजी हुईं, अब बस छायाओं में डूबी हुई लग रही थीं। हॉल की फर्श पर पड़े कालीन की मुलायमियत अमन के जूतों के नीचे दब गई, लेकिन कोई आवाज नहीं हुई – सिर्फ उसकी सांसों की हल्की गूंज। बाहर की सड़क से आने वाली गाड़ियों की दूर की आवाजें भी दीवारों से टकराकर मर जातीं, जैसे घर ने खुद को दुनिया से अलग कर लिया हो। हवा में एक हल्की सी ठंडक थी, क्योंकि शाम ढल चुकी थी और एयर कंडीशनर बंद था, लेकिन अमन के शरीर में एक अलग ही गर्मी फैल रही थी – उत्सुकता और घबराहट की मिली-जुली।
अंजलि ने उसे पहले ही बता दिया था: "गेस्ट रूम में इंतजार करूंगी। दरवाजा बंद करके पलंग पर बैठ जाना।" उसकी आवाज फोन पर कितनी नरम और रहस्यमयी लगी थी, जैसे कोई पुरानी किताब की पन्नों से निकली राज। अमन ने जल्दी से हॉल पार किया, उसके कदमों की आवाज फर्श पर हल्की गूंज पैदा कर रही थी। गेस्ट रूम घर के कोने में था, जहां आम तौर पर मेहमानों के लिए सजाया जाता था – सफेद चादरें, लकड़ी का मजबूत पलंग, और एक छोटा सा ड्रेसिंग टेबल। लेकिन आज यह कमरा अमन के लिए एक अलग दुनिया का द्वार लग रहा था।
दरवाजा खोलते ही अमन की आंखों पर अंधेरे का एक काला पर्दा गिर गया। कमरे में कोई रोशनी नहीं थी – न खिड़की से आती चांदनी, न कोई लैंप। सिर्फ दरवाजे से आती हॉल की हल्की पीली रोशनी कमरे में एक पतली सी रेखा बनाकर फैल रही थी, जो फर्श पर लकड़ी के पैटर्न को हल्का सा उजागर कर रही थी। हवा में एक हल्की सी सुगंध थी – अंजलि की परफ्यूम की, जो गुलाब और चंदन की मिश्रित लग रही थी, लेकिन इतनी हल्की कि अमन को लगा जैसे वह सपना देख रहा हो। बेड पर कोई नहीं था; सिर्फ चादर की सिलवटें, जो दिन की सफाई के बाद बनी हुई थीं। अमन को लगा कि अंजलि शायद बाथरूम में है – कमरे के कोने में लगा छोटा सा बाथरूम, जहां टाइल्स ठंडी और सफेद थीं, और शॉवर से पानी की बूंदें अभी भी टपक रही होंगी। वह जानता था कि अंजलि ऐसी है – जो अपने वादे पर खरी उतरती है। अगर वह उसके कहे अनुसार नहीं करेगा, तो शायद वह सामने नहीं आएगी। यह विचार अमन के मन में एक रोमांच पैदा कर रहा था, जैसे कोई खेल जिसमें नियम छिपे हुए हैं।
अमन ने जल्दी से कमरे में कदम रखा और दरवाजा बंद कर लिया। क्लिक की आवाज के साथ ही कमरा पूरी तरह से अंधेरे में डूब गया। अब कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था – न पलंग की आउटलाइन, न दीवारें, न छत। सिर्फ अमन की सांसें, जो तेज हो रही थीं, और उसके दिल की धड़कन, जो कानों में गूंज रही थी। कमरे की हवा स्थिर थी, लेकिन अमन को लगा जैसे कोई अदृश्य स्पर्श उसे छू रहा हो – उत्सुकता का स्पर्श। उसे पता था कि पलंग कहां है; वह पहले कई बार इस कमरे में आ चुका था, लेकिन कभी ऐसे माहौल में नहीं। वह अंधेरे में टटोलते हुए चला, उसके हाथ हवा में लहराए, और आखिरकार पलंग का किनारा मिला। चादर की मुलायम साटन जैसी बनावट उसके हाथों को छू गई, और वह बैठ गया। पलंग हल्का सा डूबा, जैसे अमन के वजन से सहमत हो। अमन सोच रहा था कि अब अंजलि बाथरूम से बाहर आएगी – उसकी कल्पना में वह सफेद तौलिए में लिपटी हुई, बाल गीले, आंखें चमकती हुई। लेकिन अभी सन्नाटा था, सिर्फ उसकी अपनी सांसें।
अचानक, कमरे में एक हल्की सी क्लिक की आवाज हुई, और नाइट बल्ब जल उठा। पूरे कमरे में एक गहरा नीला रंग फैल गया – जैसे कोई समुद्र की गहराई में डूबा हो। यह रोशनी इतनी मद्धम और रहस्यमयी थी कि सब कुछ छायाओं में डूबा लग रहा था; दीवारें नीली हो गईं, पलंग की चादरें नीली, और हवा में भी एक नीली धुंध सी फैल गई। अमन की आंखें इस रोशनी में समायोजित होने लगीं, और उसकी नजर लाइट के बोर्ड की तरफ गई – कमरे के कोने में लगा स्विच बोर्ड, जहां से रोशनी नियंत्रित होती थी। वहां अंजलि खड़ी थी।
कमरे की यह नीली रोशनी इतनी गहरी थी कि अंजलि का शरीर एक काली परछाई जैसा लग रहा था – उसकी आकृति स्पष्ट, लेकिन विवरण छिपे हुए। अमन को उसका चेहरा बिल्कुल नहीं दिख रहा था; सिर्फ एक काला सिल्हूट, जहां आंखें, नाक, होंठ सब विलीन हो गए थे। यहां तक कि उसका गोरा बदन, जो अमन ने पहले कई बार कल्पना में देखा था, अब काला लग रहा था – जैसे कोई रात की देवी। लेकिन अमन का ध्यान इस पर नहीं था। उसका ध्यान तो अंजलि के पूरे बदन पर था। दरअसल, कमरा नीली रोशनी से नहाया हुआ था, और अंजलि बोर्ड के पास खड़ी थी, लेकिन उसने अपने शरीर पर केवल ब्रा और पैंटी पहन रखी थी। यह दृश्य अमन को स्तब्ध कर रहा था। ब्रा और पैंटी रेडियम के धागों से बनी हुई थीं – वे धागे जो अंधेरे में चमकते हैं, और नीली रोशनी पड़ने पर वे और ज्यादा चमक उठते हैं। इस रोशनी में वे चमक रही थीं, जैसे कोई आकाशगंगा अंजलि के शरीर के चारों ओर फैली हो। अंजलि किसी स्वर्ग से उतरी अप्सरा लग रही थी – उसकी आकृति इतनी मोहक कि अमन की सांसें रुक सी गईं।
अमन ने आज तक अंजलि को सिर्फ सलवार-कुर्ती या साड़ी में देखा था – वे कपड़े जो उसके बदन को ढकते थे, लेकिन उसकी सुंदरता को उभारते थे। साड़ी की सिलवटें जब हवा में लहरातीं, तो अमन की नजरें उसके कर्व्स पर टिक जातीं, लेकिन कभी इतना खुला नहीं देखा था। आज पहली बार वह उसे इस रूप में देख रहा था, और यह दृश्य उसकी उत्तेजना को चरम पर पहुंचा रहा था। कमरे में वह एक काली परछाई के रूप में दिख रही थी, लेकिन अमन की कल्पना उसके गोरे बदन को रंग दे रही थी – वह गोरा रंग जो दूधिया लगता, मुलायम त्वचा जो रेशम जैसी। वह अंजलि के सम्मोहन में खो रहा था, जैसे कोई जादू हो।
अंजलि मटकती हुई उसके पास चली आ रही थी। अमन ने सैकड़ों बार उसे चलते देखा था – सामान्य चाल, जो शालीन और आकर्षक थी। लेकिन आज यह चाल कातिलाना लग रही थी – हर कदम में उसकी कमर की लहर, कूल्हों की हल्की सी हलचल, जैसे कोई संगीत बज रहा हो। चलते समय उसके ब्रा के ऊपर से उसके बूब्स हिल रहे थे – वे गोल, पूर्ण, और इतने मनमोहन कि अमन की नजरें उनसे हट नहीं रही थीं। ब्रा की चमकती धारियां उन्हें और उभार रही थीं, जैसे कोई रत्न। अंजलि ने थॉन्ग पैंटी पहन रखी थी – पतली, जो उसके कर्व्स को और ज्यादा सेक्सी बना रही थी। जब उसकी कमर हिलती, तो पैंटी की धारियां चमकतीं, और अमन को लगा जैसे कोई आग लग रही हो। अमन इस समय पलंग पर बैठा हुआ था, उसके हाथ हल्के से कांप रहे थे, और शरीर में एक गर्म लहर दौड़ रही थी।
अंजलि चलकर उसके सामने खड़ी हो गई। उसकी सांसें तेज थीं, लेकिन चुप्पी थी – जैसे कोई रहस्य छिपा हो। अमन ने बड़े प्यार से अपना सीधा हाथ उठाया और कामुक तरीके से अंजलि के पेट और कमर पर फेरने लगा। उसकी त्वचा इतनी मुलायम थी – जैसे मखमल, गर्म और नरम। अमन के स्पर्श से अंजलि की एक हल्की सी सिसकारी निकल गई, जिसे उसने अपने मुंह से दबा लिया – लेकिन अमन ने सुना। यह सिसकारी उसके लिए संगीत थी, जो बता रही थी कि अंजलि भी इस पल के लिए लंबे समय से इंतजार कर रही थी। वह अपने आप को रोक रही थी, शर्म और डर से, लेकिन अब वह बंधन टूट रहे थे। अमन को एहसास हो रहा था कि अंजलि की त्वचा पर हर स्पर्श एक नई उत्तेजना पैदा कर रहा था – उसकी कमर की वक्रता, पेट की सपाट मुलायमियत, सब कुछ परफेक्ट।
अमन ने अपना हाथ अंजलि के पेट से हटाया, और फिर दोनों हाथों से उसकी कमर को पकड़ लिया – मजबूती से, लेकिन प्यार से। वह अपना मुंह उसके पेट के पास लाया और उसे तीन-चार चुंबन दे दिए। पहला चुंबन जब उसके होंठों ने अंजलि के पेट को छुआ, तो अमन को लगा जैसे कोई बिजली दौड़ी हो। अंजलि का शरीर कांप उठा – एक हल्की सी कंपकंपी, जो उसके पूरे बदन में फैल गई। इससे साफ पता चल रहा था कि अपने पति के अलावा अंजलि यह पहली बार किसी और के साथ कर रही है। वह ज्यादा उत्तेजित थी, घबराई हुई, लेकिन इच्छा से भरी। उसकी सांसें तेज हो गईं, और अमन को लगा जैसे वह उसकी गर्मी महसूस कर रहा हो।
पेट को चूमने के बाद अमन ने अंजलि को घुमा दिया। अब उसके सामने अंजलि के गोल-गोल नितंब थे – पूर्ण, चिकने, और इतने आकर्षक कि अमन की नजरें उन पर ठहर गईं। उसने अपने दोनों हाथ उन पर फेरने शुरू कर दिए – धीरे-धीरे, हर इंच को महसूस करते हुए। अंजलि के नितंब बहुत चिकने थे, जैसे कोई मिट्टी की मूर्ति जिसे परफेक्ट तरीके से गढ़ा गया हो। अमन ने महसूस किया कि वे उसकी पूर्व गर्लफ्रेंड्स रानी और शीला की तरह ही कोमल थे – लेकिन अंजलि में एक अलग ही आकर्षण था, शायद उसकी परिपक्वता का। कुछ देर तक उनसे खेलने के बाद – मसलते हुए, दबाते हुए – अमन ने अपनी हॉट (हाथ) अंजलि के सीधे तरफ के नितंब पर रख दिया और उसे चूमने लगा। होंठों का स्पर्श इतना नरम था कि अंजलि की एक और सिसकारी निकली। फिर अमन ने उल्टी तरफ के नितंब पर अपने होंठ लगाकर चूमने लगा। इसके बाद उसने अपनी जीभ निकाल कर उसके नितंबों को चाटना शुरू कर दिया – जीभ की गर्मी और नमी से अंजलि का शरीर और कांप उठा। अमन को यह बहुत अच्छा लग रहा था, और अंजलि को भी पसंद आ रहा था – क्योंकि वह अपना एक हाथ अमन के बालों में डालकर उनसे खेल रही थी, धीरे-धीरे खींचते हुए, जैसे प्रोत्साहन दे रही हो।
इसके बाद अमन ने अंजलि से कहा, "तुम एक बार चलकर गेट के पास जाओ और फिर लौटकर आओ।" उसकी आवाज में एक आज्ञा थी, लेकिन प्यार भरी। अंजलि ने ऐसा ही किया – वह मटकती हुई गेट के पास गई, उसके कदमों की आवाज फर्श पर हल्की गूंज पैदा कर रही थी, और फिर से मटकती हुई अमन के पास आ गई। अमन ने यह सब इसलिए किया था क्योंकि वह अंजलि को पीछे से चलते हुए देखना चाहता था – उसके नितंबों की हलचल, ऊपर-नीचे होते हुए, जैसे कोई लहर। यह दृश्य पहले से ज्यादा सुंदर था – नीली रोशनी में चमकते पैंटी के धागे उसके हर मूवमेंट को हाइलाइट कर रहे थे। अमन के मन में एक गहरा आकर्षण जाग रहा था, जैसे वह किसी सपने में हो।
अमन ने गौर किया कि अंजलि बिल्कुल भी कुछ नहीं बोल रही थी – वह पूरी तरह से खामोश हो गई थी। उसकी चुप्पी में शर्म थी, घबराहट थी, लेकिन साथ ही समर्पण भी। अमन को लगा कि वह शर्मा रही है, इसलिए कुछ नहीं बोल रही, लेकिन जो वह कह रहा है, वह कर रही है – इस समय के लिए यही काफी है। जब उसकी झिझक खुल जाएगी, तो वह बात करने लगेगी, हंसने लगेगी, और ज्यादा खुल जाएगी।
अमन खड़ा हुआ और अपना एक हाथ अंजलि के चेहरे और गले पर फेरा – धीरे से, जैसे कोई कीमती चीज छू रहा हो। उसकी त्वचा गर्म थी, और गले की नसें तेज धड़क रही थीं। फिर उसने अपने दोनों हाथ उसके सीने पर फेरने शुरू कर दिए – उसके एब्स, जो मजबूत और आकर्षक थे। अंजलि जिस तरह से उन पर हाथ फेर रही थी, अमन को साफ पता चल रहा था कि उसे उसके एब्स पसंद आ रहे हैं – उसकी उंगलियां हर मसल को ट्रेस कर रही थीं। अमन ने अपना हाथ पीछे कर लिया, लेकिन अंजलि ने प्यार से उसके सीने पर हाथ फेरना जारी रखा और फिर झुककर कई जगह उसकी छाती पर किस किया – गर्म, नरम चुंबन, जो अमन की त्वचा पर आग लगा रहे थे।
अमन को लग रहा था कि अब अंजलि धीरे-धीरे खुल रही है – उसकी चुप्पी टूट रही थी, और शरीर की भाषा बोल रही थी। जब अंजलि संतुष्ट हो गई, तो उसने अमन को छोड़ दिया। अमन ने अंजलि को बेड पर सीधा लेटने के लिए कहा। अंजलि पलंग के ऊपर गई – उसके कदम हल्के, लेकिन आत्मविश्वास से भरे – और पलंग पर जाकर सीधा लेट गई। चादर उसके बदन के नीचे सरसराई, और नीली रोशनी में उसका सिल्हूट और ज्यादा मोहक लग रहा था।
अमन ने जल्दी से अपनी शर्ट उतारी – बटन एक-एक करके खोलते हुए, जैसे कोई रस्म। शर्ट साइड में रखी, और फिर आराम से अपना लोअर उतार कर साइड में रख दिया। लोअर की जेब में दो कंडोम और कई डार्क चॉकलेट रखी हुई थी। अब अमन केवल बॉक्सर में था – उसका शरीर मजबूत, लेकिन इस रोशनी में छायादार। वह पलंग के ऊपर आया, और अंजलि के पैरों की तरफ चला गया। वह उसके दोनों पैरों को चूमता हुआ ऊपर की ओर चढ़ने लगा – पहले पैर की उंगलियां, फिर टखने, घुटने – हर चुंबन गर्म और धीमा। उसकी मुलायम जांघों को चूमता हुआ – जांघों की आंतरिक त्वचा इतनी संवेदनशील कि अंजलि की सांसें तेज हो गईं। उसके बाद पेट को चूमता हुआ बूब्स के पास आ गया, लेकिन बूब्स को छूए बिना – सिर्फ उनके बीच से गुजरते हुए – उसकी गर्दन को चूमता हुआ उसके गालों को चूमा।
अंजलि भी उसका पूरा साथ दे रही थी – वह अपने दोनों हाथों को कभी उसके बालों में डालकर खेलती, कभी उसकी पीठ पर फेरती – उसकी उंगलियां अमन की त्वचा पर खरोंच सी पैदा कर रही थीं, लेकिन सुखद। अब अमन अंजलि के ऊपर आ गया। उसने अंजलि के दोनों हाथों में अपनी उंगलियां फंसा लीं और उन्हें पलंग पर दबा दिया – मजबूती से, लेकिन प्रेम से। दोनों के बदन आपस में मिल चुके थे – अमन की छाती अंजलि के बूब्स से दब रही थी, ब्रा के माध्यम से। अंजलि ने अपनी दोनों टांगें खोल रखी थीं और उन्हें अमन की कमर के चारों ओर जकड़ लिया था – जैसे कोई बंधन। अंजलि की चूत पर पहनी पैंटी अमन के बॉक्सर के अंदर के लंड से चिपकी हुई थी – दोनों एक-दूसरे की गर्मी महसूस कर रहे थे, जैसे कोई आग सुलग रही हो। ऊपर तो दोनों का मिलन हो चुका था – अमन ने अपने होंठ अंजलि के मुलायम और कोमल होंठों पर रख दिए थे और दोनों एक-दूसरे को बेइंतहा तरीके से किस कर रहे थे। होंठों का मिलन गहरा था – जीभें आपस में लिपट रही थीं, सांसें मिश्रित। वे लगातार एक-दूसरे को किस कर रहे थे और अपने बदनों को आपस में रगड़ रहे थे – हर रगड़ से उत्तेजना बढ़ रही थी। यहां तक कि उनके चूत और लंड भी एक-दूसरे में समा जाने के लिए तड़प रहे थे; ऐसा लग रहा था कि अमन का लंड बॉक्सर फाड़कर अंजलि की चूत में समा जाएगा। अंजलि की चूत में इतनी आग लगी हुई थी कि वह इन कपड़ों के बंधन को जलाकर अमन के लंड को अपने अंदर ले लेगी। माहौल में सिर्फ उनकी सांसें, चुंबनों की आवाजें, और नीली रोशनी का जादू था – जैसे समय रुक गया हो।
बदन की आग
बदन की आग 2
अध्याय 2: बदन की आग 2
किस करते-करते अंजलि की सांस फूलने लगी थी, वह अपने होंठ अमन के होंठों से हटाने लगी। कमरे की गहरी नीली रोशनी में उनकी सांसों की गर्माहट आपस में मिलकर एक धुंध सी पैदा कर रही थी, जैसे कोई बादल उनके बीच तैर रहा हो। अमन के होंठ अभी भी अंजलि के होंठों की नरमी को महसूस कर रहे थे – वे होंठ इतने मुलायम थे कि अमन को लगा जैसे वह किसी गुलाब की पंखुड़ियों को चूम रहा हो, लेकिन अब अंजलि की सांसें तेज और अनियमित हो रही थीं, उसके सीने की ऊंची-नीची हलचल से साफ लग रहा था कि वह थक रही है या शायद उत्तेजना की चरम पर पहुंच रही है। अमन उसे और किस करना चाहता था, क्योंकि उसके मुलायम होंठों को किस करने में मजा आ रहा था – हर चुंबन में एक मीठी गर्मी थी, जैसे शहद की धारा, और अमन की जीभ अंजलि की जीभ से लिपटकर एक अलग ही दुनिया में खो जाना चाहती थी। लेकिन उसने अंजलि को छोड़ दिया, धीरे से अपने होंठ पीछे खींचते हुए, क्योंकि वह जानता था कि रुकना भी उतना ही जरूरी है जितना आगे बढ़ना। अंजलि तेज-तेज सांस लेने लगी, उसकी छाती ऊपर-नीचे हो रही थी, और नीली रोशनी में उसके बूब्स की हलचल और ज्यादा आकर्षक लग रही थी – जैसे कोई लहरें उठ रही हों। कमरे का सन्नाटा अब उनकी सांसों से भरा हुआ था, दीवारें जैसे उनकी उत्तेजना को सोख रही थीं, और हवा में एक हल्की सी नमी फैल गई थी, शायद पसीने की बूंदों से।
अमन उसके ऊपर से उठ गया और उसके दोनों कंधों से उसकी ब्रा को उसके हाथों से निकाल दिया। ब्रा की स्ट्रैप्स धीरे-धीरे सरकती हुईं, उसकी त्वचा पर एक हल्की सी खरोंच पैदा करती हुईं, और जैसे ही ब्रा नीचे हो गई, अंजलि के दोनों बूब्स आजाद हो गए। नीली रोशनी में वे गोरे और पूर्ण लग रहे थे, लेकिन रोशनी की गहराई से छायादार – जैसे कोई चंद्रमा के नीचे की मूर्तियां। अमन की नजरें उन पर ठहर गईं, उनके आकार की परफेक्शन, निपल्स की हल्की सी गुलाबी रंगत जो रोशनी में चमक रही थी। अमन उसके दोनों बूब्स को प्यार से मसलने लगा, अपनी हथेलियों से उन्हें सहलाते हुए, हर स्पर्श में एक नरमी डालते हुए। साथ में उसके दोनों निपल्स को अपनी उंगलियों से सहलाने लगा – उंगलियां धीरे-धीरे घुमाते हुए, जैसे कोई संगीत बजा रहा हो। इसके साथ-साथ बीच-बीच में बूब्स दबाने और मसलने के साथ-साथ अपनी दोनों हाथों की एक उंगली और अंगूठे से दोनों बूब्स को इस तरह से मसल रहा था, जिससे अंजलि और ज्यादा उत्तेजित हो रही थी, क्योंकि उसकी सांसें गर्म हो रही थीं और वह गहरी-गहरी सांस ले रही थी। हर मसलने से अंजलि का शरीर हल्का सा कांप उठता, जैसे कोई बिजली की लहर दौड़ रही हो, और वह हल्का सा झटपटा रही थी – उसके पैरों की उंगलियां चादर में सिकुड़ रही थीं, और कमर हल्की सी उठ रही थी। अमन यह जान-बूझकर कर रहा था, क्योंकि उसकी गर्लफ्रेंड जो उसकी टीचर थी, उसने उसे बताया था कि अगर किसी लड़की या औरत को ज्यादा उत्तेजित करना तो किसी भी मर्द को उसके बूब्स और निप्पल से खेलना आना चाहिए। अमन को याद था वह बात: "अगर कोई भी मर्द ऐसा करने में सक्षम है, तो वह लड़की खुद ही उसका लंड लेने के लिए तड़पेगी।" अमन ने अंजलि के कान में फुसफुसाया, "तुम्हारे ये इतने कोमल हैं, जैसे मेरे लिए बने हों... मैं इन्हें चूमते हुए रुक नहीं पाता।" क्योंकि अब अंजलि गर्म होने लगी थी, अब केवल उसमें घी डालना बाकी रह गया था जिससे उसकी अंदर की आग और भड़क जाएगी। कमरे की नीली रोशनी अब उनकी त्वचा पर एक नीली चमक पैदा कर रही थी, जैसे कोई जादुई दुनिया, और सन्नाटा उनकी सिसकारियों से टूट रहा था।
अमन ने देर नहीं की और उसके एक बूब्स को छोड़कर उसके निपल्स को मुंह में लेकर चूसने लगा। उसका मुंह गर्म था, जीभ निपल के चारों ओर घूम रही थी, चूसते हुए हल्का सा खींचते हुए। दूसरे बूब्स को अमन अभी भी दबा रहा था और निपल्स को मसल रहा था – उंगलियां दबाव डालते हुए, लेकिन इतना कि दर्द न हो, सिर्फ सुख। अंजलि पर झटपटाने लगी थी, वह बार-बार अमन के सर को अपने बूब्स पर दबा रही थी, उसके हाथ अमन के बालों में उलझ रहे थे, खींचते हुए, जैसे कह रही हो "और करो"। इससे साफ पता चल रहा था उसे भी बहुत मजा आ रहा है – उसकी सांसें और तेज, शरीर की हर मसल टाइट। अमन लगातार एक ही बूब्स चूस रहा था और दूसरे से खेल रहा था। अमन ने कहा, "तुम्हारी ये नरमी मुझे पागल कर देती है, अंजलि... जैसे कोई मीठा फल।" अंजलि ताकत से अमन का सर अपने बूब्स से हटाने लगी, लेकिन अमन हटते हुए भी उसका निप्पल चूसे जा रहा था – जीभ से आखिरी स्पर्श देते हुए। अंजलि का एक निपल्स पूरा खड़ा हो गया था, गुलाबी और चमकदार। अमन कुछ करने की सोचता उससे पहले ही अंजलि ने अमन का सर अपने बूब्स पर फिर से दबा दिया और अपना निपल्स उसके मुंह में घुसा दिया। लेकिन यह बूब्स दूसरा वाला था, अमन दूसरे बूब्स के निप्पल को चूसने लगा, और पहले बूब्स को हाथ से मसलने लगा – अब भूमिकाएं बदल गईं, लेकिन उत्तेजना वैसी ही।
अंजलि अपना हाथ नीचे ले जाने लगी, और अमन के बॉक्सर में डालने की कोशिश करने लगी, उसकी उंगलियां बॉक्सर के किनारे पर पहुंच गईं, लेकिन उससे पहले ही अमन का जो हाथ फ्री था उसने उसका हाथ पकड़ लिया – मजबूती से, लेकिन प्यार से। और दोनों हाथों को ऊपर लाकर अपनी एक हाथ से दबा दिया। अंजलि इस खेल में सब कुछ करना चाह रही थी और खुद उसकी लगाम अपने हाथ में लेना चाह रही थी, परंतु अमन ने उसकी सारी योजना पर पानी फेर दिया। क्योंकि अमन किसी भी हाल में अंजलि को अपने ऊपर काबू नहीं करने देना चाहता था – वह चाहता था कि सब उसके कंट्रोल में हो, ताकि उत्तेजना धीरे-धीरे बढ़े। अमन बारी-बारी से दोनों बूब्स के निपल्स को चूसता और दूसरे हाथ से उसके बूब्स को मसलता। अंजली बहुत तड़प रही थी, पूरे कमरे में उसकी सिसकारियां गूंज रही थीं – वे सिसकारियां नीली रोशनी में जैसे कोई संगीत, दीवारों से टकराकर लौट रही थीं। वह बार-बार अपनी कमर हिला-हिलाकर अपनी चूत, जो पैंटी से ढकी हुई थी, अमन के लंड के उभार वाले हिस्से जिस पर बॉक्सर था, उस पर रगड़ रही थी – हर रगड़ से एक गर्मी फैल रही थी, जैसे कोई चिंगारी। अमन इसी तरह काफी देर तक उसके बूब्स से खेलता रहा, हर मिनट को लंबा खींचते हुए, उत्तेजना को चरम पर ले जाते हुए।
फिर उसने अंजलि के बूब्स को छोड़ दिया, और उसके हाथों को आजाद कर दिया। और उसके घुटने मुड़कर उसकी टांगों के बीच में आ गया – अब वह अंजलि के पैरों के बीच बैठा था, नीली रोशनी में उसका सिल्हूट और ज्यादा रहस्यमयी लग रहा था। सबसे पहले अमन ने दोनों हाथों से अंजलि की पैंटी को उसकी टांगों से निकाल दिया – धीरे-धीरे सरकाते हुए, उसकी जांघों पर स्पर्श करते हुए, पैंटी की चमकती धारियां रोशनी में चमक रही थीं। और उसकी टांगें हिलाकर अपना मुंह उसके पास ले आया। सबसे पहले अमन ने अपना एक हाथ अंजलि की चूत पर फेरा – चूत एकदम बिल्कुल साफ और चिकनी थी, जैसे रेशम, कोई बाल नहीं, सिर्फ मुलायम त्वचा। इससे साफ पता चल रहा था कि इसे कुछ देर पहले ही क्लीन किया गया है – शायद अंजलि ने तैयारी की थी, इस पल के लिए। अमन ने अपनी मिडिल फिंगर अंजलि की चूत में डाली, अंजलि की चूत किसी आग की तरह धड़क रही थी – गर्म, नम, और कसावदार। इससे साफ पता चल रहा था कि यह बहुत समय से प्यासी है। अमन को याद था कि अंजलि के भाई अनिल ने उसे बताया था कि अंजलि को विधवा हुए 6 महीने हो चुके हैं। इससे साफ पता चल रहा था कि उसे 6 महीने से कोई लंड नहीं मिला है, बेशक वह किसी न किसी चीज को लंड की तरह इस्तेमाल कर अपनी प्यास बुझा लेती होगी। परंतु असली लंड और नकली लंड में बहुत अंतर होता है, नकली लंड कितना भी चूत में चला जाएगा, परंतु वह असली लंड जैसी संतुष्टि नहीं दे सकता है, फिर चाहे लंड कैसा भी हो – असली की गर्मी, धड़कन, और स्पर्श अलग होता है। अमन ने तेजी से अपनी मिडिल फिंगर को अंजलि की चूत में अंदर-बाहर करने लगा – हर मूवमेंट में गहराई बढ़ाते हुए, उंगली की नोक से अंदर की दीवारों को छूते हुए। अंजलि भी अपनी टांगें खोलकर उसका पूरा आनंद ले रही थी – उसकी जांघें कांप रही थीं, और सांसें और तेज। अमन ने कहा, "तुम्हारी ये गर्मी... जैसे मेरे लिए जल रही हो, अंजलि। मैं इसे बुझाऊंगा, धीरे-धीरे।"
अमन ने अंजलि को और आनंद देने के लिए अपना मुंह अंजलि की चूत के पास ले गया। और अपनी जीभ निकाल के अंजलि के चूत के दाने को चाटने लगा – जीभ की नोक से धीरे-धीरे घुमाते हुए, चाटते हुए। पहले तो अंजलि को यह सब करने में बड़ा मजा आ रहा था – उसकी सिसकारियां बढ़ गईं। लेकिन इससे अंजलि का शरीर और उत्तेजित होने लगा, वह अपनी कमर हिला-हिलाकर अमन की मिडिल फिंगर को ज्यादा से ज्यादा अंदर लेने की कोशिश कर रही थी – हर हिलाव से चादर सरसराती। और साथ में पलंग से ऊपर से अपने चूतड़ों को उठा-उठाकर अपनी चूत के दाने को तेजी से चटवाने की कोशिश कर रही थी। अमन बड़े ही उत्तेजक तरीके से यह सब किए जा रहा था, उसे साफ पता चल रहा था कि अंजलि को यहां सब पसंद आ रहा है – उसकी आंखें बंद, मुंह हल्का सा खुला। अगर एक बार अंजलि को उसके साथ चुदाई करना अच्छा लगा, तो फिर अंजलि हमेशा उसके साथ चुदाई करेगी। इसीलिए अमन कोई भी कसर नहीं छोड़ना चाहता था, इसीलिए वह खुद सब कुछ करना चाहता था और अंजलि उसके इशारे पर उसका साथ दे। काफी देर तक इसी तरह से अमन उसे उत्तेजित करता रहा – मिनटों को घंटों जैसा लंबा बनाते हुए। जैसे ही अंजलि झड़ने को ही अमन ने तुरंत अपनी उंगली चूत से बाहर निकाल ली, और अंजलि के चूत के दाने को जीभ से चाटना बंद करके अपनी जीभ हटा ली।
अंजलि ने अमन के सर को अपनी चूत पर दबाने की कोशिश की, उसके हाथ मजबूती से पकड़ते हुए, लेकिन अमन की ताकत के आगे अंजलि कुछ नहीं कर पाई – वह पीछे हट गया। अमन उसके ऊपर जाकर उसे किस करने लगा। इस बार अंजलि उसे किस करने में ज्यादा रुचि नहीं दिखा रही थी, अमन को साफ पता चल रहा था, अंजलि को उसकी हरकत पसंद नहीं आई – वह तड़प रही थी, लेकिन रुकावट से नाराज। पर वह अंजलि को इतनी जल्दी झड़ाकर शांत नहीं करना चाहता था – वह चाहता था कि उत्तेजना बनी रहे। कुछ देर तक अमन अंजलि के बदन से खेलता रहा – उसके पेट पर, जांघों पर स्पर्श करते हुए। अमन ने फिर से गौर किया कि अंजलि को उसकी यह हरकत पसंद नहीं आई थी, फिर भी वह कुछ भी नहीं बोल रही थी, ऐसा लग रहा था कि वह पूरी तरह से गूंगी हो गई है, परंतु अमन को उसकी इस खामोशी का बिल्कुल भी पता नहीं चल रहा था कि वह ऐसा क्यों कर रही है। अब तो उनके बीच इतना कुछ हो चुका है और वे लोग इतने आगे बढ़ चुके हैं, फिर भी अंजलि के मुंह से एक भी शब्द नहीं निकल रहा था, बस अंजलि के मुंह से सिसकारियां निकल रही थीं – वे सिसकारियां कमरे को भर रही थीं, नीली रोशनी में जैसे कोई रहस्य।
फिर अमन ने अंजलि के कान में कहा, "अब हम 69 की पोजीशन में करेंगे, लेकिन उससे पहले तुम मेरे लंड को चूसो।" कमरे में अभी भी नीली रोशनी हो रही थी, जो सब कुछ रहस्यमयी बना रही थी। दोनों लेटे हुए थे। अमन पलंग पर ही खड़ा हो गया – उसका सिल्हूट लंबा और मजबूत लग रहा था। अंजलि पलंग पर अमन के सामने घुटनों के बल बैठ गई। और जैसे ही उसने अमन का बॉक्सर उसकी जांघों तक सरकाया – धीरे-धीरे, बॉक्सर की कपड़े सरसराते हुए। उसके मुंह से सिसकारी निकली और उसने जल्दी से अपना मुंह अपने हाथ से ढक लिया। जैसे उसने कोई भयानक चीज देख ली है। नीली रोशनी में अमन का लंड किसी काले सांप की तरह फड़फड़ा रहा था। अगर कमरे में सफेद रोशनी भी होती तभी अमन का लंड काले नाग की तरह ही फड़फड़ाता, क्योंकि अमन पूरी तरह से काले रंग का था। कुछ देर तक लंड को निहारने के बाद अंजलि ने डरते हुए अपने हाथ को आगे बढ़ाया और अमन के लंड को पकड़ कर उसका मुआयना करने लगी। अमन का लंड पूरे 11 इंच का लंबा था, और उसकी मोटाई का डायमीटर 2 इंच का था, और उसकी सुपाड़े का डायमीटर सवा 2 इंच का। अमन का लंड गधे के लंड के समान था। अंजलि ने जब अमन के लंड के चारों ओर अपनी मुट्ठी बंदी, तो वह उसके हाथ से काफी बड़ा था। उसके हाथ उसके मिल नहीं रहे थे। वह आश्चर्य से उसे देखे जा रही थी। अमन अंजलि से कहता है क्या इस लंड को ऐसे ही देखती रहोगी या उसके साथ खेलना भी शुरू करोगी ।
किस करते-करते अंजलि की सांस फूलने लगी थी, वह अपने होंठ अमन के होंठों से हटाने लगी। कमरे की गहरी नीली रोशनी में उनकी सांसों की गर्माहट आपस में मिलकर एक धुंध सी पैदा कर रही थी, जैसे कोई बादल उनके बीच तैर रहा हो। अमन के होंठ अभी भी अंजलि के होंठों की नरमी को महसूस कर रहे थे – वे होंठ इतने मुलायम थे कि अमन को लगा जैसे वह किसी गुलाब की पंखुड़ियों को चूम रहा हो, लेकिन अब अंजलि की सांसें तेज और अनियमित हो रही थीं, उसके सीने की ऊंची-नीची हलचल से साफ लग रहा था कि वह थक रही है या शायद उत्तेजना की चरम पर पहुंच रही है। अमन उसे और किस करना चाहता था, क्योंकि उसके मुलायम होंठों को किस करने में मजा आ रहा था – हर चुंबन में एक मीठी गर्मी थी, जैसे शहद की धारा, और अमन की जीभ अंजलि की जीभ से लिपटकर एक अलग ही दुनिया में खो जाना चाहती थी। लेकिन उसने अंजलि को छोड़ दिया, धीरे से अपने होंठ पीछे खींचते हुए, क्योंकि वह जानता था कि रुकना भी उतना ही जरूरी है जितना आगे बढ़ना। अंजलि तेज-तेज सांस लेने लगी, उसकी छाती ऊपर-नीचे हो रही थी, और नीली रोशनी में उसके बूब्स की हलचल और ज्यादा आकर्षक लग रही थी – जैसे कोई लहरें उठ रही हों। कमरे का सन्नाटा अब उनकी सांसों से भरा हुआ था, दीवारें जैसे उनकी उत्तेजना को सोख रही थीं, और हवा में एक हल्की सी नमी फैल गई थी, शायद पसीने की बूंदों से।
अमन उसके ऊपर से उठ गया और उसके दोनों कंधों से उसकी ब्रा को उसके हाथों से निकाल दिया। ब्रा की स्ट्रैप्स धीरे-धीरे सरकती हुईं, उसकी त्वचा पर एक हल्की सी खरोंच पैदा करती हुईं, और जैसे ही ब्रा नीचे हो गई, अंजलि के दोनों बूब्स आजाद हो गए। नीली रोशनी में वे गोरे और पूर्ण लग रहे थे, लेकिन रोशनी की गहराई से छायादार – जैसे कोई चंद्रमा के नीचे की मूर्तियां। अमन की नजरें उन पर ठहर गईं, उनके आकार की परफेक्शन, निपल्स की हल्की सी गुलाबी रंगत जो रोशनी में चमक रही थी। अमन उसके दोनों बूब्स को प्यार से मसलने लगा, अपनी हथेलियों से उन्हें सहलाते हुए, हर स्पर्श में एक नरमी डालते हुए। साथ में उसके दोनों निपल्स को अपनी उंगलियों से सहलाने लगा – उंगलियां धीरे-धीरे घुमाते हुए, जैसे कोई संगीत बजा रहा हो। इसके साथ-साथ बीच-बीच में बूब्स दबाने और मसलने के साथ-साथ अपनी दोनों हाथों की एक उंगली और अंगूठे से दोनों बूब्स को इस तरह से मसल रहा था, जिससे अंजलि और ज्यादा उत्तेजित हो रही थी, क्योंकि उसकी सांसें गर्म हो रही थीं और वह गहरी-गहरी सांस ले रही थी। हर मसलने से अंजलि का शरीर हल्का सा कांप उठता, जैसे कोई बिजली की लहर दौड़ रही हो, और वह हल्का सा झटपटा रही थी – उसके पैरों की उंगलियां चादर में सिकुड़ रही थीं, और कमर हल्की सी उठ रही थी। अमन यह जान-बूझकर कर रहा था, क्योंकि उसकी गर्लफ्रेंड जो उसकी टीचर थी, उसने उसे बताया था कि अगर किसी लड़की या औरत को ज्यादा उत्तेजित करना तो किसी भी मर्द को उसके बूब्स और निप्पल से खेलना आना चाहिए। अमन को याद था वह बात: "अगर कोई भी मर्द ऐसा करने में सक्षम है, तो वह लड़की खुद ही उसका लंड लेने के लिए तड़पेगी।" अमन ने अंजलि के कान में फुसफुसाया, "तुम्हारे ये इतने कोमल हैं, जैसे मेरे लिए बने हों... मैं इन्हें चूमते हुए रुक नहीं पाता।" क्योंकि अब अंजलि गर्म होने लगी थी, अब केवल उसमें घी डालना बाकी रह गया था जिससे उसकी अंदर की आग और भड़क जाएगी। कमरे की नीली रोशनी अब उनकी त्वचा पर एक नीली चमक पैदा कर रही थी, जैसे कोई जादुई दुनिया, और सन्नाटा उनकी सिसकारियों से टूट रहा था।
अमन ने देर नहीं की और उसके एक बूब्स को छोड़कर उसके निपल्स को मुंह में लेकर चूसने लगा। उसका मुंह गर्म था, जीभ निपल के चारों ओर घूम रही थी, चूसते हुए हल्का सा खींचते हुए। दूसरे बूब्स को अमन अभी भी दबा रहा था और निपल्स को मसल रहा था – उंगलियां दबाव डालते हुए, लेकिन इतना कि दर्द न हो, सिर्फ सुख। अंजलि पर झटपटाने लगी थी, वह बार-बार अमन के सर को अपने बूब्स पर दबा रही थी, उसके हाथ अमन के बालों में उलझ रहे थे, खींचते हुए, जैसे कह रही हो "और करो"। इससे साफ पता चल रहा था उसे भी बहुत मजा आ रहा है – उसकी सांसें और तेज, शरीर की हर मसल टाइट। अमन लगातार एक ही बूब्स चूस रहा था और दूसरे से खेल रहा था। अमन ने कहा, "तुम्हारी ये नरमी मुझे पागल कर देती है, अंजलि... जैसे कोई मीठा फल।" अंजलि ताकत से अमन का सर अपने बूब्स से हटाने लगी, लेकिन अमन हटते हुए भी उसका निप्पल चूसे जा रहा था – जीभ से आखिरी स्पर्श देते हुए। अंजलि का एक निपल्स पूरा खड़ा हो गया था, गुलाबी और चमकदार। अमन कुछ करने की सोचता उससे पहले ही अंजलि ने अमन का सर अपने बूब्स पर फिर से दबा दिया और अपना निपल्स उसके मुंह में घुसा दिया। लेकिन यह बूब्स दूसरा वाला था, अमन दूसरे बूब्स के निप्पल को चूसने लगा, और पहले बूब्स को हाथ से मसलने लगा – अब भूमिकाएं बदल गईं, लेकिन उत्तेजना वैसी ही।
अंजलि अपना हाथ नीचे ले जाने लगी, और अमन के बॉक्सर में डालने की कोशिश करने लगी, उसकी उंगलियां बॉक्सर के किनारे पर पहुंच गईं, लेकिन उससे पहले ही अमन का जो हाथ फ्री था उसने उसका हाथ पकड़ लिया – मजबूती से, लेकिन प्यार से। और दोनों हाथों को ऊपर लाकर अपनी एक हाथ से दबा दिया। अंजलि इस खेल में सब कुछ करना चाह रही थी और खुद उसकी लगाम अपने हाथ में लेना चाह रही थी, परंतु अमन ने उसकी सारी योजना पर पानी फेर दिया। क्योंकि अमन किसी भी हाल में अंजलि को अपने ऊपर काबू नहीं करने देना चाहता था – वह चाहता था कि सब उसके कंट्रोल में हो, ताकि उत्तेजना धीरे-धीरे बढ़े। अमन बारी-बारी से दोनों बूब्स के निपल्स को चूसता और दूसरे हाथ से उसके बूब्स को मसलता। अंजली बहुत तड़प रही थी, पूरे कमरे में उसकी सिसकारियां गूंज रही थीं – वे सिसकारियां नीली रोशनी में जैसे कोई संगीत, दीवारों से टकराकर लौट रही थीं। वह बार-बार अपनी कमर हिला-हिलाकर अपनी चूत, जो पैंटी से ढकी हुई थी, अमन के लंड के उभार वाले हिस्से जिस पर बॉक्सर था, उस पर रगड़ रही थी – हर रगड़ से एक गर्मी फैल रही थी, जैसे कोई चिंगारी। अमन इसी तरह काफी देर तक उसके बूब्स से खेलता रहा, हर मिनट को लंबा खींचते हुए, उत्तेजना को चरम पर ले जाते हुए।
फिर उसने अंजलि के बूब्स को छोड़ दिया, और उसके हाथों को आजाद कर दिया। और उसके घुटने मुड़कर उसकी टांगों के बीच में आ गया – अब वह अंजलि के पैरों के बीच बैठा था, नीली रोशनी में उसका सिल्हूट और ज्यादा रहस्यमयी लग रहा था। सबसे पहले अमन ने दोनों हाथों से अंजलि की पैंटी को उसकी टांगों से निकाल दिया – धीरे-धीरे सरकाते हुए, उसकी जांघों पर स्पर्श करते हुए, पैंटी की चमकती धारियां रोशनी में चमक रही थीं। और उसकी टांगें हिलाकर अपना मुंह उसके पास ले आया। सबसे पहले अमन ने अपना एक हाथ अंजलि की चूत पर फेरा – चूत एकदम बिल्कुल साफ और चिकनी थी, जैसे रेशम, कोई बाल नहीं, सिर्फ मुलायम त्वचा। इससे साफ पता चल रहा था कि इसे कुछ देर पहले ही क्लीन किया गया है – शायद अंजलि ने तैयारी की थी, इस पल के लिए। अमन ने अपनी मिडिल फिंगर अंजलि की चूत में डाली, अंजलि की चूत किसी आग की तरह धड़क रही थी – गर्म, नम, और कसावदार। इससे साफ पता चल रहा था कि यह बहुत समय से प्यासी है। अमन को याद था कि अंजलि के भाई अनिल ने उसे बताया था कि अंजलि को विधवा हुए 6 महीने हो चुके हैं। इससे साफ पता चल रहा था कि उसे 6 महीने से कोई लंड नहीं मिला है, बेशक वह किसी न किसी चीज को लंड की तरह इस्तेमाल कर अपनी प्यास बुझा लेती होगी। परंतु असली लंड और नकली लंड में बहुत अंतर होता है, नकली लंड कितना भी चूत में चला जाएगा, परंतु वह असली लंड जैसी संतुष्टि नहीं दे सकता है, फिर चाहे लंड कैसा भी हो – असली की गर्मी, धड़कन, और स्पर्श अलग होता है। अमन ने तेजी से अपनी मिडिल फिंगर को अंजलि की चूत में अंदर-बाहर करने लगा – हर मूवमेंट में गहराई बढ़ाते हुए, उंगली की नोक से अंदर की दीवारों को छूते हुए। अंजलि भी अपनी टांगें खोलकर उसका पूरा आनंद ले रही थी – उसकी जांघें कांप रही थीं, और सांसें और तेज। अमन ने कहा, "तुम्हारी ये गर्मी... जैसे मेरे लिए जल रही हो, अंजलि। मैं इसे बुझाऊंगा, धीरे-धीरे।"
अमन ने अंजलि को और आनंद देने के लिए अपना मुंह अंजलि की चूत के पास ले गया। और अपनी जीभ निकाल के अंजलि के चूत के दाने को चाटने लगा – जीभ की नोक से धीरे-धीरे घुमाते हुए, चाटते हुए। पहले तो अंजलि को यह सब करने में बड़ा मजा आ रहा था – उसकी सिसकारियां बढ़ गईं। लेकिन इससे अंजलि का शरीर और उत्तेजित होने लगा, वह अपनी कमर हिला-हिलाकर अमन की मिडिल फिंगर को ज्यादा से ज्यादा अंदर लेने की कोशिश कर रही थी – हर हिलाव से चादर सरसराती। और साथ में पलंग से ऊपर से अपने चूतड़ों को उठा-उठाकर अपनी चूत के दाने को तेजी से चटवाने की कोशिश कर रही थी। अमन बड़े ही उत्तेजक तरीके से यह सब किए जा रहा था, उसे साफ पता चल रहा था कि अंजलि को यहां सब पसंद आ रहा है – उसकी आंखें बंद, मुंह हल्का सा खुला। अगर एक बार अंजलि को उसके साथ चुदाई करना अच्छा लगा, तो फिर अंजलि हमेशा उसके साथ चुदाई करेगी। इसीलिए अमन कोई भी कसर नहीं छोड़ना चाहता था, इसीलिए वह खुद सब कुछ करना चाहता था और अंजलि उसके इशारे पर उसका साथ दे। काफी देर तक इसी तरह से अमन उसे उत्तेजित करता रहा – मिनटों को घंटों जैसा लंबा बनाते हुए। जैसे ही अंजलि झड़ने को ही अमन ने तुरंत अपनी उंगली चूत से बाहर निकाल ली, और अंजलि के चूत के दाने को जीभ से चाटना बंद करके अपनी जीभ हटा ली।
अंजलि ने अमन के सर को अपनी चूत पर दबाने की कोशिश की, उसके हाथ मजबूती से पकड़ते हुए, लेकिन अमन की ताकत के आगे अंजलि कुछ नहीं कर पाई – वह पीछे हट गया। अमन उसके ऊपर जाकर उसे किस करने लगा। इस बार अंजलि उसे किस करने में ज्यादा रुचि नहीं दिखा रही थी, अमन को साफ पता चल रहा था, अंजलि को उसकी हरकत पसंद नहीं आई – वह तड़प रही थी, लेकिन रुकावट से नाराज। पर वह अंजलि को इतनी जल्दी झड़ाकर शांत नहीं करना चाहता था – वह चाहता था कि उत्तेजना बनी रहे। कुछ देर तक अमन अंजलि के बदन से खेलता रहा – उसके पेट पर, जांघों पर स्पर्श करते हुए। अमन ने फिर से गौर किया कि अंजलि को उसकी यह हरकत पसंद नहीं आई थी, फिर भी वह कुछ भी नहीं बोल रही थी, ऐसा लग रहा था कि वह पूरी तरह से गूंगी हो गई है, परंतु अमन को उसकी इस खामोशी का बिल्कुल भी पता नहीं चल रहा था कि वह ऐसा क्यों कर रही है। अब तो उनके बीच इतना कुछ हो चुका है और वे लोग इतने आगे बढ़ चुके हैं, फिर भी अंजलि के मुंह से एक भी शब्द नहीं निकल रहा था, बस अंजलि के मुंह से सिसकारियां निकल रही थीं – वे सिसकारियां कमरे को भर रही थीं, नीली रोशनी में जैसे कोई रहस्य।
फिर अमन ने अंजलि के कान में कहा, "अब हम 69 की पोजीशन में करेंगे, लेकिन उससे पहले तुम मेरे लंड को चूसो।" कमरे में अभी भी नीली रोशनी हो रही थी, जो सब कुछ रहस्यमयी बना रही थी। दोनों लेटे हुए थे। अमन पलंग पर ही खड़ा हो गया – उसका सिल्हूट लंबा और मजबूत लग रहा था। अंजलि पलंग पर अमन के सामने घुटनों के बल बैठ गई। और जैसे ही उसने अमन का बॉक्सर उसकी जांघों तक सरकाया – धीरे-धीरे, बॉक्सर की कपड़े सरसराते हुए। उसके मुंह से सिसकारी निकली और उसने जल्दी से अपना मुंह अपने हाथ से ढक लिया। जैसे उसने कोई भयानक चीज देख ली है। नीली रोशनी में अमन का लंड किसी काले सांप की तरह फड़फड़ा रहा था। अगर कमरे में सफेद रोशनी भी होती तभी अमन का लंड काले नाग की तरह ही फड़फड़ाता, क्योंकि अमन पूरी तरह से काले रंग का था। कुछ देर तक लंड को निहारने के बाद अंजलि ने डरते हुए अपने हाथ को आगे बढ़ाया और अमन के लंड को पकड़ कर उसका मुआयना करने लगी। अमन का लंड पूरे 11 इंच का लंबा था, और उसकी मोटाई का डायमीटर 2 इंच का था, और उसकी सुपाड़े का डायमीटर सवा 2 इंच का। अमन का लंड गधे के लंड के समान था। अंजलि ने जब अमन के लंड के चारों ओर अपनी मुट्ठी बंदी, तो वह उसके हाथ से काफी बड़ा था। उसके हाथ उसके मिल नहीं रहे थे। वह आश्चर्य से उसे देखे जा रही थी। अमन अंजलि से कहता है क्या इस लंड को ऐसे ही देखती रहोगी या उसके साथ खेलना भी शुरू करोगी ।