मैने चोंक कर पूछा, क्या हुवा ?
वो बोला, कुछ नही ये एक प्यारा खेल है, पूरा निकाल कर अंदर डालूँगा, देखना तुझे बहुत अछा लगेगा.
मैने कहा, तुम एक दम पागल हो.
उसने एक झटके में पूरा लिंग मेरी योनि में घुस्सा दिया और बोला, तो देख पागल कैसे प्यार करता है.
मैं फिर से चीन्ख उठी, आबीयायेयीयियीयैआइयियैयीयियीयियी…अहह ज़रा धीरे से बिल्लू, मुझे दर्द हो रहा है.
वो बोला, सॉरी-सॉरी मुझे ध्यान ही नही रहा.
उसने फिर से लिंग बाहर निकाल कर धीरे से मेरे अंदर घुस्साया और बोला, इस तरह ठीक है.
मैने शरमाते हुवे कहा, मुझे नही पता.
थोड़ी देर तक बिल्लू यू ही करता रहा और मेरी बेचानी बढ़ती चली गयी.
मेरी साँसे इतनी तेज थी की मेरे पाशीने छूट रहे थे.
फिर अचानक बिल्लू अपना लिंग पूरा मेरे अंदर घुस्सा कर रुक गया और बोला, आआअहह कितना मज़ा आ रहा है, तुझे कैसा लग रहा है.
मैने कोई जवाब नही दिया, मैं बस उन पॅलो में खो गयी थी.
अचानक बिल्लू हल्के हल्के धक्के लगाने लगा, मेरी साँसे फूलने लगी.
उसने पूछा, अब कैसा लग रहा है ?
मैने झीज़कते हुवे धीरे से कहा, पता नही, तुम करते रहो ना, मुझ से क्यो पूछते हो.
वो रुक गया और बोला, अरे मुझे पता कैसे चलेगा कि तुझे मज़ा आ रहा है कि नही.
मैने पूछा, क्या तुम्हे मेरी हालत से नही लगता कि मुझे कैसा लग रहा है.
वो बोला, वो तो ठीक है पर एक बार बोल कर बता देगी तो तेरा क्या चला जाएगा.
मैने कोई जवाब नही दिया.
बिल्लू फिर से धक्के लगाने लगा, पर इस बार उसकी स्पीड थोड़ी बढ़ गयी थी.
थोडा रुक कर उसने मेरे एक निपल को मूह में दबा लिया और फिर उसे चूस्ते हुवे मेरी योनि में तेज़ी से धक्के मारने लगा.
मेरा मज़ा बढ़ता ही जा रहा था, अब मेरी योनि और मेरे उभार दोनो एक साथ बिल्लू के हाथो का खिलोना बने हुवे थे.
ऐसा लग रहा था जैसे कि बिल्लू के अंदर कामदेव उतर आए है, मैं इस कदर मदहोश हो रही थी.
अचानक बिल्लू मेरे उभारो से हट गया और मेरी योनि से भी लिंग बाहर निकाल लिया.
मैने धीरे से पूछा क्या हुवा ?
वो बोला, कुछ नही, थोडा घूम जाओ तेरी पीछे से डाल कर मारूँगा.
मैने दीवार पर टॅंगी घड़ी में देखा तो पाया कि 12:45 हो रहे थे.
मैने बिल्लू से कहा वक्त कम है तुम ऐसे ही कर लो ना.
पर सचाई तो ये थी कि मुझे उसके आगे फिर से ऐसी पोज़िशन लेने में झीजक हो रही थी.
घर के पीछे उस दिन भी मुझे बहुत शरम आ रही थी.
वो बोला, अरे सोच क्या रही है, चल घूम ना, तुझे और ज़्यादा मज़ा आएगा, तुझे पता है ना डॉगी स्टाइल इंशान की सेक्स करने की सबसे नॅचुरल पोज़िशन है.
मैने पूछा, तुम क्या मुझे काम्सुत्र पढ़ा रहे हो ?
वो बेशर्मी से बोला, नही तुझे चूत देने की सबसे सेक्सी पोज़िशन बता रहा हू.
छोटी सी भूल compleet
Re: छोटी सी भूल
ये पोज़िशन मेरे लिए नयी नही थी, संजय अक्सर मुझसे इस पोज़ीशन में करते थे, पर मुझे कभी कुछ केश नही लगा था.
बिल्लू बोला, चल ना यार वक्त बर्बाद मत कर, उस दिन झाड़ियो में भी तो कुछ ऐसी ही पोज़िशन में किया था, अब क्या प्राब्लम है तुझे.
मैं झीज़कते हुवे उसके आगे डॉगी स्टाइल में आ गयी.
उसने पीछे से मेरे नितंबो को थाम लिया और एक झटके में अपना पूरा लिंग मेरी योनि में घुस्सा दिया.
मेरे मूह से हल्की सी आआहह निकल गयी.
वो बोला, अभी भी दर्द है क्या.
मैने कहा, नही ठीक है, तुम जल्दी कर लो हमारे पास वक्त कम है.
उसने पूछा, कितना वक्त है.
मैने कहा, 1:30 बजे तक तुम्हे हर हाल में जाना होगा, चिंटू उसके बाद कभी भी आ सकता है.
वो बोला, ठीक है, तब तक तू आराम से मज़ा ले.
ये कह कर वो मेरी योनि में पीछे से धक्के मारने लगा.
मेरे उभार इस पोजीसन में बिल्लू के धक्को के कारण हवा में झूल रहे थे.
उसने पूछा, कैसा लग रहा है ?
मैने उसके सवाल का कोई जवाब नही दिया.
उसने मेरे कानो के पास आ कर पूछा, क्या आज फिर गांद मरवाना चाहोगी ?
मैने झीज़कते हुवे कहा, नही आज नही, तुम जल्दी से, जो कर रहे हो, वो ख़तम करो ना.
वो बोला, ठीक है, तुझे जल्दी का मज़ा चाहिए ना, ले संभाल फिर.
ये कह कर उसने बहुत तेज तेज मेरी योनि में अपना लिंग अंदर बाहर धकैलना शुरू कर दिया.
मैं इसके लिए बिल्कुल भी तैयार नही थी.
मैने कहा, रूको, थोडा धीरे से करो.
पर वो नही माना और बोला, जल्दी ऐसे ही तो होगा, अब क्या तकलीफ़ है तुझे, तू मज़ा ले ना.
थोड़ी ही देर में मुझे इतना मज़ा आने लगा कि मेरा मन और तेज़ी की चाहत करने लगा.
पर मैने बिल्लू से कुछ नही कहा.
मेरी साँसे और मेरी धड़कन बिल्लू के धक्को की तेज़ी के साथ कदम मिलाने की कोशिश कर रही थी
उसका लिंग मेरी योनि में इतनी तेज़ी से रगडे खा रहा था कि मुझ से होश संभालना मुस्किल हुवा जा रहा था, ऐसा लग रहा था जैसे में चक्कर खा कर गिर जाउन्गि.
बिल्लू की साँसे भी भड़क रही थी, उसने टूटे हुवे शब्दो में पूछा कैसा….. लग….. रहा…..है… अब.
इस बार मेरे मूह से निकल ही गया,
आ…आ….अक्चहाा……बहुत…आक्फया
वो बोला, तो यू ही मारता रहूं.
मैने कहा, जैसा तुम चाहो पर जल्दी करो.
बिल्लू बिना रुके थोड़ी देर तक यू ही उसी स्पीड में करता रहा.
बिल्लू का लिंग मेरी योनि की हर गहराई तक जा कर रगड़ लगा रहा था और मैं उसके हर धक्के का मज़ा ले रही थी.
उसने पूछा, बता कब तक मारु ?
मैने हड़बड़ाते हुवे कहा, अब जल्दी ख़तम करो, मुझे घर का काम भी करना है.
बिल्लू ने अपनी स्पीड और ज़्यादा बढ़ा दी.
मेरी साँसे भी और ज़्यादा रफ़्तार पकड़ने लगी.
मेरे आनंद की कोई शीमा नही रही, इतना मज़ा आ रहा था कि मुझ से बर्दास्त करना मुश्किल हो रहा था.
अचानक मेरे शन्यम का बाँध टूट गया और मेरी योनि ने पानी छोड़ दिया.
मैने हड़बड़ाते हुवे कहा, बिल्लू प्लीज़ रुक जाओ, अब सहा नही जा रहा.
वो फूलती हुई सांसो में बोला, बस थोड़ी देर और मारने दे.
मैने कहा, ठीक है पर जल्दी करो.
बिल्लू बहुत तेज तेज धक्के लगा कर अचानक रुक गया और मुझे अंदर से पूरा भिगो दिया.
मेरी योनि में इतना पानी इकट्ठा हो गया जैसे कि कोई समुंदर हो.
वो उशी हालत में मेरे उपर गिर गया.
बिल्लू बोला, चल ना यार वक्त बर्बाद मत कर, उस दिन झाड़ियो में भी तो कुछ ऐसी ही पोज़िशन में किया था, अब क्या प्राब्लम है तुझे.
मैं झीज़कते हुवे उसके आगे डॉगी स्टाइल में आ गयी.
उसने पीछे से मेरे नितंबो को थाम लिया और एक झटके में अपना पूरा लिंग मेरी योनि में घुस्सा दिया.
मेरे मूह से हल्की सी आआहह निकल गयी.
वो बोला, अभी भी दर्द है क्या.
मैने कहा, नही ठीक है, तुम जल्दी कर लो हमारे पास वक्त कम है.
उसने पूछा, कितना वक्त है.
मैने कहा, 1:30 बजे तक तुम्हे हर हाल में जाना होगा, चिंटू उसके बाद कभी भी आ सकता है.
वो बोला, ठीक है, तब तक तू आराम से मज़ा ले.
ये कह कर वो मेरी योनि में पीछे से धक्के मारने लगा.
मेरे उभार इस पोजीसन में बिल्लू के धक्को के कारण हवा में झूल रहे थे.
उसने पूछा, कैसा लग रहा है ?
मैने उसके सवाल का कोई जवाब नही दिया.
उसने मेरे कानो के पास आ कर पूछा, क्या आज फिर गांद मरवाना चाहोगी ?
मैने झीज़कते हुवे कहा, नही आज नही, तुम जल्दी से, जो कर रहे हो, वो ख़तम करो ना.
वो बोला, ठीक है, तुझे जल्दी का मज़ा चाहिए ना, ले संभाल फिर.
ये कह कर उसने बहुत तेज तेज मेरी योनि में अपना लिंग अंदर बाहर धकैलना शुरू कर दिया.
मैं इसके लिए बिल्कुल भी तैयार नही थी.
मैने कहा, रूको, थोडा धीरे से करो.
पर वो नही माना और बोला, जल्दी ऐसे ही तो होगा, अब क्या तकलीफ़ है तुझे, तू मज़ा ले ना.
थोड़ी ही देर में मुझे इतना मज़ा आने लगा कि मेरा मन और तेज़ी की चाहत करने लगा.
पर मैने बिल्लू से कुछ नही कहा.
मेरी साँसे और मेरी धड़कन बिल्लू के धक्को की तेज़ी के साथ कदम मिलाने की कोशिश कर रही थी
उसका लिंग मेरी योनि में इतनी तेज़ी से रगडे खा रहा था कि मुझ से होश संभालना मुस्किल हुवा जा रहा था, ऐसा लग रहा था जैसे में चक्कर खा कर गिर जाउन्गि.
बिल्लू की साँसे भी भड़क रही थी, उसने टूटे हुवे शब्दो में पूछा कैसा….. लग….. रहा…..है… अब.
इस बार मेरे मूह से निकल ही गया,
आ…आ….अक्चहाा……बहुत…आक्फया
वो बोला, तो यू ही मारता रहूं.
मैने कहा, जैसा तुम चाहो पर जल्दी करो.
बिल्लू बिना रुके थोड़ी देर तक यू ही उसी स्पीड में करता रहा.
बिल्लू का लिंग मेरी योनि की हर गहराई तक जा कर रगड़ लगा रहा था और मैं उसके हर धक्के का मज़ा ले रही थी.
उसने पूछा, बता कब तक मारु ?
मैने हड़बड़ाते हुवे कहा, अब जल्दी ख़तम करो, मुझे घर का काम भी करना है.
बिल्लू ने अपनी स्पीड और ज़्यादा बढ़ा दी.
मेरी साँसे भी और ज़्यादा रफ़्तार पकड़ने लगी.
मेरे आनंद की कोई शीमा नही रही, इतना मज़ा आ रहा था कि मुझ से बर्दास्त करना मुश्किल हो रहा था.
अचानक मेरे शन्यम का बाँध टूट गया और मेरी योनि ने पानी छोड़ दिया.
मैने हड़बड़ाते हुवे कहा, बिल्लू प्लीज़ रुक जाओ, अब सहा नही जा रहा.
वो फूलती हुई सांसो में बोला, बस थोड़ी देर और मारने दे.
मैने कहा, ठीक है पर जल्दी करो.
बिल्लू बहुत तेज तेज धक्के लगा कर अचानक रुक गया और मुझे अंदर से पूरा भिगो दिया.
मेरी योनि में इतना पानी इकट्ठा हो गया जैसे कि कोई समुंदर हो.
वो उशी हालत में मेरे उपर गिर गया.
Re: छोटी सी भूल
वो उशी हालत में मेरे उपर गिर गया.
मैं भी लड़खड़ा कर नीचे लेट गयी.
उसका लिंग अभी भी मेरी योनि में घुस्सा हुवा था.
1:30 बजने ही वाले थे, मैने बिल्लू से कहा, अब निकाल लो.
वो बोला थोड़ी देर और अंदर रहने दे ना.
मैने कहा, नही बिल्लू अब तुम्हे हर हाल में जाना होगा. मुझे कपड़े पहन कर काम भी करना है.
वो बोला, ठीक है, जैसी तेरी मर्ज़ी.
उसने धीरे से अपना लिंग बाहर निकाल लिया.
थोड़ी देर मैं यू ही पड़ी रही. मेरे हाथ पाँव जैसे काम करना बंद कर चुके थे.
ऐसा लग रहा था कि मैं उठ नही पाउन्गि.
ऐसा मेरे साथ पहले कभी नही हुवा था.
हिम्मत कर के मैं जैसे तैसे उठ गयी.
मैने चारो तरफ नज़र डोदाई तो पाया की मेरे कपड़े यहा वाहा बीखरे पड़े है.
बिल्लू मेरी तरफ देख कर बड़ी बेशर्मी से मुस्कुरा रहा था.
मैने हड़बड़ाते हुवे कहा, तुम कपड़े पहन कर जल्दी जाओ ना यहा से.
मैने अपने कपड़े पहन लिए.
बिल्लू ने अपने कपड़े पहन कर पूछा, फिर कब मीलोगि.
मैने बिल्लू से पूछा, तुम मेरे साथ कोई खेल तो नही खेल रहे ?
वो बोला, तुझे क्या लगता है.
मैने कहा मुझे नही पता, हां पर तुमने मुझे अपने पति का गुनहगार बना दिया है, उन्हे पता चलेगा तो मैं क्या करूँगी, वो मुझे कभी माफ़ नही करेंगे.
वो बोला, तू चिंता मत कर जब वक्त आएगा तो देख लेंगे फिलहाल तू मज़ा कर.
मैने कहा, ये कोई मज़ाक नही है, तुम मेरे ही पीछे क्यो पड़े हो, इस सहर में क्या और लड़किया नही है.
वो बोला, लड़किया तो बहुत है पर तेरे जैसी कोई नही है, जो मज़ा तेरे साथ आता है वो किसी के साथ नही आ सकता.
मैने कहा, देखो अब तुम मेरा सब कुछ ले चुके हो, और तुम्हे क्या चाहिए, अब तुम मुझे भूल जाओ और किसी अछी से लड़की को देख कर शादी कर लो.
वो बोला, तू ऐसी बाते मत कर में तुझे नही भुला सकता.
मैने कहा, तुम समझते क्यो नही मैं शादी शुदा हूँ और अपने परिवार में खुश हूँ. मैं ये सब करके बहुत ज़्यादा गिल्ट से भर जाती हूँ, मैं घुट घुट कर नही जी सकती.
वो बोला, तुझे घुट कर जीने को कों बोल रहा है, तू खुल कर मज़े ले ना.
मैने कहा, तुम अब जाओ, तुम कभी नही समझोगे.
बिल्लू ने आगे बढ़ कर मेरे होंटो को चूम लिया और बोला, तो तुम समझा दो ना.
मैने कहा, तुम अब जाओगे या नही, या मुझे पूरी तरह बर्बाद करके जाओगे.
वो बोला, ठीक है मैं अभी जाता हू फिर कभी बात करेंगे.
मैने कुछ भी कहना ठीक नही समझा मैं उस वक्त उसे वाहा से भेजना चाहती थी, चिंटू की बस किसी भी वक्त आ सकती थी.
मैं भी लड़खड़ा कर नीचे लेट गयी.
उसका लिंग अभी भी मेरी योनि में घुस्सा हुवा था.
1:30 बजने ही वाले थे, मैने बिल्लू से कहा, अब निकाल लो.
वो बोला थोड़ी देर और अंदर रहने दे ना.
मैने कहा, नही बिल्लू अब तुम्हे हर हाल में जाना होगा. मुझे कपड़े पहन कर काम भी करना है.
वो बोला, ठीक है, जैसी तेरी मर्ज़ी.
उसने धीरे से अपना लिंग बाहर निकाल लिया.
थोड़ी देर मैं यू ही पड़ी रही. मेरे हाथ पाँव जैसे काम करना बंद कर चुके थे.
ऐसा लग रहा था कि मैं उठ नही पाउन्गि.
ऐसा मेरे साथ पहले कभी नही हुवा था.
हिम्मत कर के मैं जैसे तैसे उठ गयी.
मैने चारो तरफ नज़र डोदाई तो पाया की मेरे कपड़े यहा वाहा बीखरे पड़े है.
बिल्लू मेरी तरफ देख कर बड़ी बेशर्मी से मुस्कुरा रहा था.
मैने हड़बड़ाते हुवे कहा, तुम कपड़े पहन कर जल्दी जाओ ना यहा से.
मैने अपने कपड़े पहन लिए.
बिल्लू ने अपने कपड़े पहन कर पूछा, फिर कब मीलोगि.
मैने बिल्लू से पूछा, तुम मेरे साथ कोई खेल तो नही खेल रहे ?
वो बोला, तुझे क्या लगता है.
मैने कहा मुझे नही पता, हां पर तुमने मुझे अपने पति का गुनहगार बना दिया है, उन्हे पता चलेगा तो मैं क्या करूँगी, वो मुझे कभी माफ़ नही करेंगे.
वो बोला, तू चिंता मत कर जब वक्त आएगा तो देख लेंगे फिलहाल तू मज़ा कर.
मैने कहा, ये कोई मज़ाक नही है, तुम मेरे ही पीछे क्यो पड़े हो, इस सहर में क्या और लड़किया नही है.
वो बोला, लड़किया तो बहुत है पर तेरे जैसी कोई नही है, जो मज़ा तेरे साथ आता है वो किसी के साथ नही आ सकता.
मैने कहा, देखो अब तुम मेरा सब कुछ ले चुके हो, और तुम्हे क्या चाहिए, अब तुम मुझे भूल जाओ और किसी अछी से लड़की को देख कर शादी कर लो.
वो बोला, तू ऐसी बाते मत कर में तुझे नही भुला सकता.
मैने कहा, तुम समझते क्यो नही मैं शादी शुदा हूँ और अपने परिवार में खुश हूँ. मैं ये सब करके बहुत ज़्यादा गिल्ट से भर जाती हूँ, मैं घुट घुट कर नही जी सकती.
वो बोला, तुझे घुट कर जीने को कों बोल रहा है, तू खुल कर मज़े ले ना.
मैने कहा, तुम अब जाओ, तुम कभी नही समझोगे.
बिल्लू ने आगे बढ़ कर मेरे होंटो को चूम लिया और बोला, तो तुम समझा दो ना.
मैने कहा, तुम अब जाओगे या नही, या मुझे पूरी तरह बर्बाद करके जाओगे.
वो बोला, ठीक है मैं अभी जाता हू फिर कभी बात करेंगे.
मैने कुछ भी कहना ठीक नही समझा मैं उस वक्त उसे वाहा से भेजना चाहती थी, चिंटू की बस किसी भी वक्त आ सकती थी.